राज भाषा में हुआ
हैं ,
अजब सा घालमेल |
हिंदी – अंग्रेजी
की
खिचड़ी में, निपट रहा हैं देश ||
दोगली सी नीतियों के , बहुरंगी हैं अर्थ
|
लोग बाग हैं
त्रस्त लड़ रहे , लेकर अपने अस्त्र
||
आत्मा हैं हिंदी पर , पहने
अंग्रेजी वस्त्र
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स्वाद हाथ का भूल रहे , काँटे छूरी के भक्त ||