गाँधी और कृष्ण दोनो की तुलना पर तो पुस्तक लिखी जा सकती हैं । सर्वप्रथम दोनो को समान स्तर पर ले आना होगा तुलना के दृष्टि से । कृष्ण तो भगवान हैं और वो किसी भी रूप मे स्वीकार्य हैं अतः उन्हे ही ऐतिहासिक मानव मानते हुए गाँधी के सामने रखते हैं क्षमा सहित सिर्फ तुलनात्मक विचारों को प्रतिष्ठित करने हेतु ।
दोनो का सम्बन्ध कारागार से था - एक का जन्म से दूसरे का कर्म
से । दोनो का सम्यक विकास अपने जन्मभूमि से दूर हुआ - एक का गोकुल ,
बृन्दावन और द्वारिका और दूसरे का अफ्रिका में । दोनो ही अपने देश ,