Monday, August 24, 2015

सिय बन्दना : जय जय जय मिथिलाक धिया



जय जय जय मिथिलाक धिया

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जय जय जय मिथिलाक धिया ,
हे जनक – नन्दनी राम प्रिया ।
शिवधनु लय नित अरिपन करय ,
छी मिथिला आँखिक नेह सिया ॥

Monday, July 27, 2015

कजरी : फेर घुरि आयल कारी रे बदरिया



कजरी : फेर घुरि आयल कारी रे बदरिया

फेर घुरि आयल कारी रे बदरिया ,
बिजुरी चमकय अकास रे ।
जियरा मे उठय हिलोर बिदेशिया ,
तोरा बिना मनवा उदास रे ॥

Friday, June 12, 2015

प्रभु तुम अविनाशी

भजन :- प्रभु तुम अविनाशी
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प्रभु तुम अविनाशी , दिव्य प्रकाशी ,
बिघ्न विनाशक हर्ता ।
मैं मनुज विलासी , भूमि प्रवासी ,
अहंकार घट भर्ता ॥

Sunday, April 26, 2015

वृक्षों का सन्देश



               वृक्षों का सन्देश


हम  फेफड़े , हैं  इस  धरा  के ।
हमसे हीं जीवन , हैं इस धरा पे ॥

                        हमने दिया हैं इस जग को खाना ,
                        हमसे चहकता हैं  सारा जमाना ।
                        बसेरे दिये  सभ्यताओं को हमने ,
                        बरसते हैं बादल हमीं से धरा पे ॥

Friday, March 13, 2015

मोर का नृत्य

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मोर का नृत्य
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ले पंख नोच न कहीं मेरा ,
सुन्दरता पर मोहित मानव ।
हैं भला इसी में बिधि मेरा ,
लूँ खिसक विथि वन हो लाघव ॥