जय जय जय मिथिलाक
धिया
-------------------------------
जय जय जय मिथिलाक
धिया ,
हे जनक – नन्दनी राम
प्रिया ।
शिवधनु लय नित अरिपन
करय ,
छी मिथिला आँखिक नेह सिया
॥
".. हमारे दिल से आपके दिल तक ,/ बात निकली है तो जायेगी दूर तक ,/ ये 'किरण'जो चली है यहाँ से वहाँ तक ,/ रौशनी कर देगी वहाँ , पहुँचेगी जहाँ तक । " ----------- अश्विनी कुमार तिवारी