Sunday, October 25, 2015

अष्टपदी : श्रृंगावली



अष्टपदी : श्रृंगावली  

मुखहास
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मुखहास दबौने  खन खन खनकल चूड़ी हाथमे,
खुलल लट बिन्दी सेनुर चमकय धन्या भालमे ।
नहि सोचल अंजाने कयलक परिहास अंचोकमे ,
श्यामक बंशी बाजय लागल राधारानीकेँ नेहमे ॥

Monday, September 14, 2015

हमारी राजभाषा हिन्दी भाग 5


हमारी राजभाषा हिन्दी भाग 5

 

            भारत एक बहुआयामी, बहुभाषी , धार्मिक , भौगौलिक , संस्कारों, परम्पराओं और जैव बिबिधता से समृद्ध देश हैं । इस देश की सांस्कृतिक और साझी विरासत ने हरेक विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी इसे भारत के रूप में बनाए रक्खा हैं ।
 
जहाँ तक भाषा का प्रश्न हैं पूरे भारत में इतनी भाषाएँ उपभाषाएँ और बोलियाँ और उनकी स्वतंत्र लिपियाँ हैं कि सम्भवत: किसी एक जगह उनका सही रिकार्ड भी मिलना मात्र सन्योग ही होगा । यहाँ तो भाषा कि स्थिति और चलन ऐसी हैं कि जाति उपजाति धर्म स्त्री पुरूष गाँव शहर में भी एक जैसी नही बोली जाती । ऐसा सिर्फ हिंदी के साथ हीं हैं ऐसा नही ये स्थिति भारत की प्रत्येक भाषा के साथ हैं  इसी कारण तो एक बहुत प्रसिद्ध कहावत हैं कि  “ पाँच कोस पर वाणी बदले दस कोस पर पानी “ । भाषा पर जब भी बात करे इस तथ्य से मुँह मोड़ना भारत को नही समझने जैसा हैं ।

Monday, August 24, 2015

सिय बन्दना : जय जय जय मिथिलाक धिया



जय जय जय मिथिलाक धिया

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जय जय जय मिथिलाक धिया ,
हे जनक – नन्दनी राम प्रिया ।
शिवधनु लय नित अरिपन करय ,
छी मिथिला आँखिक नेह सिया ॥

Monday, July 27, 2015

कजरी : फेर घुरि आयल कारी रे बदरिया



कजरी : फेर घुरि आयल कारी रे बदरिया

फेर घुरि आयल कारी रे बदरिया ,
बिजुरी चमकय अकास रे ।
जियरा मे उठय हिलोर बिदेशिया ,
तोरा बिना मनवा उदास रे ॥

Friday, June 12, 2015

प्रभु तुम अविनाशी

भजन :- प्रभु तुम अविनाशी
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प्रभु तुम अविनाशी , दिव्य प्रकाशी ,
बिघ्न विनाशक हर्ता ।
मैं मनुज विलासी , भूमि प्रवासी ,
अहंकार घट भर्ता ॥