नए वर्ष का आना जाना
नए वर्ष का
आना जाना , कितने हीं जज्बात लिखे ।
अरमानों के दीप जलाकर
, सपनो की सौगात बुने
॥
जब आया था वही ललक
थी , वही पुलकती थी काया ।
अंतरतम के दीप
वही थे , वही स्वप्न सजती माया ॥
सुख दु:ख के ताने
बाने सा , करघे का घर-घर नाद सुने ।
समय चक्र की बलिवेदी
पर , अर्पित अतीत का राग गुने ॥