फिर
भी !
परिवर्तन संसार का
नियम हैं , और जड़त्व भी
,
नये निर्माण को
टूटती है जड़ता , तो होता है कष्ट भी ।
कोई नही जानता टूटते
वक्त , विनाश है या सृजन भी ,
कष्ट से गुरजते हुए
आगे , मिले कहीं , कोई खुशी भी ॥
".. हमारे दिल से आपके दिल तक ,/ बात निकली है तो जायेगी दूर तक ,/ ये 'किरण'जो चली है यहाँ से वहाँ तक ,/ रौशनी कर देगी वहाँ , पहुँचेगी जहाँ तक । " ----------- अश्विनी कुमार तिवारी