कजरी : फेर घुरि आयल
कारी रे बदरिया
फेर घुरि आयल कारी
रे बदरिया ,
बिजुरी चमकय अकास रे
।
जियरा मे उठय हिलोर
बिदेशिया ,
तोरा बिना मनवा उदास
रे ॥
".. हमारे दिल से आपके दिल तक ,/ बात निकली है तो जायेगी दूर तक ,/ ये 'किरण'जो चली है यहाँ से वहाँ तक ,/ रौशनी कर देगी वहाँ , पहुँचेगी जहाँ तक । " ----------- अश्विनी कुमार तिवारी