॥ अथ कथा भस्मासुर ॥
जा क’ कहल कथा पति लक्ष्मी , सौँ विस्तार सुनाय ।
आब अहीं टा स’ सम्भव अछि गौरीपति हित न्याय ॥१॥
".. हमारे दिल से आपके दिल तक ,/ बात निकली है तो जायेगी दूर तक ,/ ये 'किरण'जो चली है यहाँ से वहाँ तक ,/ रौशनी कर देगी वहाँ , पहुँचेगी जहाँ तक । " ----------- अश्विनी कुमार तिवारी