Thursday, February 4, 2016

बंदित हे शिव आदिसुते



बंदित हेशिव-आदिसुते
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सकल फलाफल सिद्धविनायक बुद्धि सहायक गौरिसुते ।
गणगणनायक ऋद्धिविधायक विघ्नविनासक सिद्धिपते ॥
हर हर शम्भु शि-वाय सनातन शिष्यनुवर्तन मानतुते ।
जयजय हे गण-नाथ गुणाश्रय बंदित हेशिव-आदिसुते ॥1॥ 

Wednesday, January 27, 2016

कह_मुकरी

कह_मुकरी
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(१)
ओकरा बिनु नै रहल जाय ।
भेँटय नहि तों माथ दुखाय ॥
अनुपम ताप देखि मुख आह ।
की सखि साजन ? नइ सखि चाह !!

Wednesday, December 30, 2015

कृष्ण



.......... कृष्ण ............
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राजीव नयन वारीज वयन,
             श्रींगार अयन मधुराधिपती ।
बृषभानुसुता प्रिय गोपसखा,
            रसराज सुधा मदनाधिपती ॥

Sunday, October 25, 2015

अष्टपदी : श्रृंगावली



अष्टपदी : श्रृंगावली  

मुखहास
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मुखहास दबौने  खन खन खनकल चूड़ी हाथमे,
खुलल लट बिन्दी सेनुर चमकय धन्या भालमे ।
नहि सोचल अंजाने कयलक परिहास अंचोकमे ,
श्यामक बंशी बाजय लागल राधारानीकेँ नेहमे ॥

Monday, September 14, 2015

हमारी राजभाषा हिन्दी भाग 5


हमारी राजभाषा हिन्दी भाग 5

 

            भारत एक बहुआयामी, बहुभाषी , धार्मिक , भौगौलिक , संस्कारों, परम्पराओं और जैव बिबिधता से समृद्ध देश हैं । इस देश की सांस्कृतिक और साझी विरासत ने हरेक विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी इसे भारत के रूप में बनाए रक्खा हैं ।
 
जहाँ तक भाषा का प्रश्न हैं पूरे भारत में इतनी भाषाएँ उपभाषाएँ और बोलियाँ और उनकी स्वतंत्र लिपियाँ हैं कि सम्भवत: किसी एक जगह उनका सही रिकार्ड भी मिलना मात्र सन्योग ही होगा । यहाँ तो भाषा कि स्थिति और चलन ऐसी हैं कि जाति उपजाति धर्म स्त्री पुरूष गाँव शहर में भी एक जैसी नही बोली जाती । ऐसा सिर्फ हिंदी के साथ हीं हैं ऐसा नही ये स्थिति भारत की प्रत्येक भाषा के साथ हैं  इसी कारण तो एक बहुत प्रसिद्ध कहावत हैं कि  “ पाँच कोस पर वाणी बदले दस कोस पर पानी “ । भाषा पर जब भी बात करे इस तथ्य से मुँह मोड़ना भारत को नही समझने जैसा हैं ।