॥ रस निष्पत्ति ॥
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श्रृंगार :
चन्द्रमाँ आइ हुनक छ’विकेँ
देखाओंसि में ।
चमकि रहल छै कनी आर
राति पूनम में ॥
सितारा चुनर के देखि
लजा तरेगण सब ।
नुका रहल छै प्रिये ,
देखू राति पूनम में ॥1॥
".. हमारे दिल से आपके दिल तक ,/ बात निकली है तो जायेगी दूर तक ,/ ये 'किरण'जो चली है यहाँ से वहाँ तक ,/ रौशनी कर देगी वहाँ , पहुँचेगी जहाँ तक । " ----------- अश्विनी कुमार तिवारी