Thursday, July 14, 2016

॥ रस निष्पत्ति ॥



॥ रस निष्पत्ति ॥
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श्रृंगार :

चन्द्रमाँ आइ हुनक छ’विकेँ देखाओंसि में ।
चमकि रहल छै कनी आर राति पूनम में ॥
सितारा चुनर के देखि लजा तरेगण सब ।
नुका रहल छै प्रिये , देखू राति पूनम में ॥1॥

Tuesday, June 7, 2016

॥ अथ कथा भस्मासुर ॥


 

॥ अथ कथा भस्मासुर ॥

 
 सुनहु एक आजु कथा सुधी जन मनकेँ ध्यान लगाय  
कोना भेलथि देवाधि देव , एक  बेर बिकट  निरुपाय ॥
जा क कहल कथा पति लक्ष्मी , सौँ  विस्तार सुनाय ।
आब अहीं टा स सम्भव अछि गौरीपति हित न्याय ॥१॥

Thursday, February 4, 2016

बंदित हे शिव आदिसुते



बंदित हेशिव-आदिसुते
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सकल फलाफल सिद्धविनायक बुद्धि सहायक गौरिसुते ।
गणगणनायक ऋद्धिविधायक विघ्नविनासक सिद्धिपते ॥
हर हर शम्भु शि-वाय सनातन शिष्यनुवर्तन मानतुते ।
जयजय हे गण-नाथ गुणाश्रय बंदित हेशिव-आदिसुते ॥1॥ 

Wednesday, January 27, 2016

कह_मुकरी

कह_मुकरी
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(१)
ओकरा बिनु नै रहल जाय ।
भेँटय नहि तों माथ दुखाय ॥
अनुपम ताप देखि मुख आह ।
की सखि साजन ? नइ सखि चाह !!

Wednesday, December 30, 2015

कृष्ण



.......... कृष्ण ............
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राजीव नयन वारीज वयन,
             श्रींगार अयन मधुराधिपती ।
बृषभानुसुता प्रिय गोपसखा,
            रसराज सुधा मदनाधिपती ॥